एक छोटी सी लम्बी कहानी! (भाग १)

मेरी जान,

ये कहना ज़रा मुश्किल है की ये एहसासात जो मेरे दिल में है उसे ‘पहली नज़र का प्यार’ कह सकते हैं या नही; पर इतना ज़रूर है कि मेरे दिल की धड़कनें एक पल को थम सी गईं थीं जब पहली बार तुम्हें देखा था। एक एक लम्हा मेरे ज़हन में यूँ ताज़ा है जैसे बस कल ही की बात हो…

मैं सीढ़ीओं के पास बैठी हौले से ढलती हुई शाम को देख रही थी, जो मेरी उदासी के रंग को और भी गहरा करती जा रही थी। कभी कTanhaiभी सबकी बातचीत में शामिल भी हो लेती थी। तभी तुम घर आये थे। आकर तुम ठीक मेरे सामने वाली कुर्सी पर बैठ गए। औपचारिक सा परिचय हुआ हमारा और फिर तुम सबके साथ बातों में लग गए । तुम्हारी तवज्जो मेरी तरफ बिलकुल भी नहीं थी, पर मेरी नजरें बार बार तुम्हारे चेहरे पर ठहर सी जाती थीं । मैं चाहकर भी अपनी नज़रों का मरकज़ बदल नहीं पा रही थी । अचानक किसी बात पर तुम मुस्कुराये… और मैं सोचने पर मजबूर हो गई… क्या वाकई किसी की मुस्कराहट इतनी खूबसूरत हो सकती है की आपके पूरे वज़ूद को अपनी गिरफ़्त में ले ले… वो मुस्कुअराहट मेरे दिल के हर कोने को रौशन कर गई ।

तो कुछ यूँ रही हमारी पहली मुलाक़ात। किसे पता था की ये सरसरी सी मुलाक़ात एक दिन एक अनोखी सी कहानी का रंग ले लेगी। एक ऐसी कहानी, जिसका हर लफ्ज़ तुम्हारे नाम हो जायेगा और मैं तुम्हारी आँखों की गहराइयों में डूब के रह जाउंगी। यूँ की किनारे गुम होने लगेंगे।

उस रोज़ अनजाने ही एक शिकस्ता कश्ती में सफर पर निकल पड़ी थी मैं. आने वाली हर लहर, हर तूफान से अन्जान। …

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